Suket Satyagraha (सुकेत सत्याग्रह)

By | November 6, 2016

सुकेत सत्याग्रह (Suket Satyagraha-1948) :

मंडी की तरह, 1914 के ग़दर आंदोलन का प्रभाव सुकेत पर भी पड़ा था । बेगार प्रथा और भ्रष्ट प्रशासन के विरुद्ध 1942 में लोगों ने आवाजें उठानी शुरू कर दी ।

दो दशकों के शांति के बाद 1945 में मियां रतन सिंह की अध्यक्ष्ता में क्रांति शुरू कर दी गयी । 1947 में सत्याग्रह शुरू कर दिया गया । फरबरी 1948 में हिमालयन हिल स्टेट्स कौंसिल ने कार्यकारी सरकार की स्थापना सुकेत में की थी । अस्थायी सरकार के अध्यक्ष पंडित शिवा नन्द रमौल थे , तथा अन्य सदस्यों में राम चंदेल (बिलासपुर), पंडित पदम देव (बुशहर), मुकंद लाल आदि थे ।

अस्थायी सरकार के सदस्यों का सम्मलेन सुन्नी (भज्जी स्टेट) में 1948 में हुआ जिसमे संपूर्ण प्रान्त बनाने के लिए आंदोलन करने का निर्णय किया गया । सुकेत रियासत को सबसे पहले आंदलन के लिए चुना गया ।

18 फरबरी 1948 में पंडित पदम देव (Pt. Padam Dev) की अध्यक्ष्ता में आहिंसातमक तरीके से आंदोलन की शुरुआत की गयी । तीन दिनों में लगभग तीन चौथाई राज्य सत्याग्रहियों के नियंत्रण में आ गया । 23 फरबरी 1948 ,राजा लक्ष्मण सेन ने भारतीय सरकार से आग्रह किया कि वो सेना भेज कर आंदोलन को समाप्त करे । 15 अप्रैल 1948 में सुकेत का विलय हिमाचल प्रदेश में कर दिया गया ।

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